उपजाऊ भूमि पर पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव: चावंरिया



कुरुक्षेत्र, पिहोवा 12 सितंबर - उपमंडल अधिकारी नागरिक पूजा चांवरिया ने कहा कि पृथ्वी की उपजाऊ क्षमता लगातार कमजोर होती जा रही है। यह सब पर्यावरण प्रदूषण की देन है। इस प्रदूषण के कारण ओजोन परत पर भी सीधा प्रभाव पडता है। पिछले वर्ष पराली जलाने की वजह से धुंए से दिल्ली में भी सांस लेना दुभर हो गया था। किसानों को इस संबंध में जागरुक किया जाना अत्यंत आवश्यक है।

एसडीएम सोमवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की बैठक में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि गत वर्ष पराली जलाने वाले 30 किसानों को जुर्माना लगाया गया एवं उनके चलान किए गए। पहली बार अवशेष जलाते पकड़े जाने वाले किसान पर पांच हजार रुपए जुर्माना होगा। दूसरी बार पकड़े जाने पर यह राशि दस हजार से 25 हजार रुपए तक होगी। गत वर्ष दिवाली के आस-पास पराली जलाने के भयंकर नुकसानों को हम भुगत चुके हैं। पराली जलाने से न केवल जमीन की उपजाऊ शक्ति कम होती है, बल्कि जमीन के मित्र कीट भी नष्टï हो जाते हैं, जो जमीन को बंजर करने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि  किसान भाईयों को चाहिए कि स्वार्थ एवं छोटे लालच को त्यागकर कस्टमर हायर सेंटर की मदद से पराली के अवशेष एकत्र कर लें या जमीन में गुदवा दें। इससे न केवल जमीन की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी, बल्कि पर्यावरण को प्रदुषित होने से बचाया जा सकेगा।

पिछले वर्ष पराली जलाने पर लगाया था 30 किसानों पर पांच हजार से 25 हजार रुपए तक का जुर्माना

उन्होंने बताया कि गत वर्ष पराली जलाने से भयंकर आग फैल गई थी, जिस पर कई घंटों में कड़ी मेहनत से काबू पाया गया। कई बार पराली जलाने से उपजे धुएं से जान-माल की भयंकर हानि होती है। उन्होंने बताया कि पिहोवा उपमंडल के सभी गांवों के पटवारी एवं ग्राम सचिवों की डयुटियां लगाई गई हैं, जो प्रत्येक दो गांवों को कवर करेंगे। ये पटवारी और ग्राम सचिव पराली जलाने की घटना को कृषि अधिकारी के समक्ष रिपोर्ट करेंगे। उन्होंने बताया कि आगामी 18 सितंबर को इस संबंध में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि गत वर्ष जितने भी जुर्माना एवं चलान किए गए, उन्हें 18 सितंबर की बैठक में प्रस्तुत किया जाए। सभी सरपंचों को भी इस बैठक में आमंत्रित किया जाएगा।

उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारी को कहा कि वे बिजली विभाग के जेई को भी साथ रखें, ताकि कोई किसान यह न कह सके कि बिजली तारों की स्पार्किंग से आग लगी है। तहसीलदार चेतना चौधरी ने कहा कि जिन-जिन पटवारियों व ग्राम सचिवों को दो-दो गांवों में डयूटी लगाई है, वे उन गांवों का नाम सहित ब्यौरा दें। उन्होंने बताया कि एसडीएम इस कार्यकी नोडल अधिकारी रहेंगी। कृषि उप निदेशक डा. कर्मचंद ने बताया कि किसान कृषि अवशेष या पराली जलाने की बजाय उसे हैरो या कल्टीवेटर से गुदाई करके उस पर केवल आधा कट्टा युरिया का डाल कर उसे जमीन में ही मिला लें। इससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ेगी एवं उपज की गुणवत्ता भी बढ़ेगी। पिहोवा उपमंडल में 25 कस्टमर हायर सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिन पर किसानों की 20 से 80 प्रतिशत की सब्सिडी दी गई है। अगर कोई किसान कस्टमर हायर सेंटर स्थापित करना चाहते हैं, तो वे 9 आदमियों की समिति बनाकर ऑनलाईन विभाग के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। आनलाईन उनके आवेदन का निपटारा होने पर उनकी सब्सिडी संबधित को पहुंच जाएगी और वे अपने उपकरण ले सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पिहोव उपमंडल में 17 जागरुक शिविर लगाए गए हैं। प्रत्येक गांव में जागरुकता शिविर लगाकर किसानों को जागरुक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 25 सितंबर से धान की कटाई शुरू होगी और अक्टूबर तक चलेगी। इस अवधि में हमें हर हालत में सजग रहना होगा। उन्होंने बताया कि गांवों में एलईडी लगाकर लोगों को जागरुक किया जाएगा, ताकि पर्यावरण प्रदूषण की जानकारी आमजन को मौके पर दी जर सके। इस मौके पर उपमंडल कृषि अधिकारी मदन सिंह, खंड कृषि अधिकारी चंद्र प्रकाश, तकनीकी सहायक डा. लेखराज, डा. इंद्र कुमार व डा. सुरेंद्र कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। एसडीने ने डा. मदन सिंह द्वारा यूटयूब पर अपलोड की गई पर्यावरण प्रदूषण को रोकने की वीडियो में दिए गए सुझावों की प्रशंसा की।
उपजाऊ भूमि पर पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव: चावंरिया उपजाऊ भूमि पर पर्यावरण प्रदूषण का प्रभाव: चावंरिया Reviewed by डिस्कवरी टाइम्स on 9/12/2018 11:32:00 pm Rating: 5
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